Thursday, 4 February 2021

Once Upon A Time

 And the Angels were leaving; She was standing near the waterfall and watching them ascending towards the sky.. She watched them till the last sign of their gleaming rays were in her sight. Finally, she sat on that nearby rock and a pair of liquid pearls rolled down on her cheeks. It was a dark, desolate and cold night.  She realized that it is not a feasible option to sit here for a long time, so she started walking; any direction, any path, any route.. She was walking without knowing anything towards nowhere. Suddenly, She heard it. She can now clearly hear it. It was him. him. She could still smell him well, even now she doesn't possess any magical super powers. It was his smell. The sound of his heavy footsteps was coming near to her; the air got heavy. She felt his warm breath. near, very near... at the back of her neck, at her hair. the vapor of his words were in her ears. He whispered, " So finally, you are here;  they left you !!! they kicked you out !!! I am curious, I am really curious !!!." she turned back towards him and looked at him with utmost disgust, a raging fire was in her eyes.... "What do you want now ? Shut your mouth and leave." 


"Ah, angel, you are still behaving like a little kitten, purring and meowing at his master's command". His poisonous laughter echoed in that desolated darkness. He is an Evil and this is how else an evil is supposed to speak and act. Why is she behaving this strange ? Where is she running ?. He took a moment to analyze the situation. 

"Where are you running ? this is Jungle, my dear. You still don't know the pathways of this jungle and
 you won't be able to go far;  Stop. Have you lost your senses ??" 

But she kept on running. And after a short while she almost fell on the ground. 
"I warned you but you don't want to listen." 
"Will you not leave me alone?" 
"You are already Alone !!" 
"No need to remind me of that. I am not asking for your mercy or sympathy."
"I know" His mouth curled up from the right side.
"You pity on me ? It was your plan to disgrace the Heaven and defame the Angel Crown." 
"Why would I do that ? I have my own Crown & reign, hope you remember that." he smiled with an utmost disgust.  
"What do you want now ? Why are you chasing me ? I am not going to fall for your sweet words again."
"I am not chasing you. You are in my Territory and it's my concern to inquire about the  unwanted entries.: he responded in a firm strong voice. 
"Unwanted Entry !!!. I am here, fallen, dejected and my tiara has been withdrawn." She cried in a despair.
"Get up, stop crying, accept yourself." He did not bother to console her.

He turned back to leave but then stopped and looked at her with a glance that was unknown for a demon, " I never anticipated this but even if I had a slightest of an expectation of your this present misery, I would have warned you about such consequences. I might have not let this happen, I would have burnt the "Reign" than seeing you here.  but my Angel !! tell me, tell me; even if I had warned you about those consequences , would you have taken your steps back ??" he whispered in a deep voice that sounds like it is coming out of an unknown person. 

"Yes, I would have. I would have never ever allowed you to tread upon the honor of  Angels."  She cried.

"No, You could have never did this. I Dare You." 
"You don't know how much I can dare ." 
"I truly don't know about how much you can dare, but I Know the limits of Goodness, Grace and Kindness of an Angel."

Suddenly, his eyes sparkled; he was back in his Avatar. 
She stood up and looked at him, her face was dry and she no longer looked like a charming angel. 

"If you need me, then you know where to find me. You know all my places. This beautiful forest is my open Palace and you can be my Guest, Forever. Off course, only if you wish so.." He smirked. 
She looked around and walked away with a hope to finding a way back to Heaven's Fountain.

Once Upon A Time An Angel and A Devil Fell in Love & It Did not End well.


Disclaimer : This Quote "Once Upon A Time An Angel and A Devil fell in Love. It did not End Well" is originally from the Author Laini Taylor from her book Daughter of Smoke & Bone. I read this quote somewhere on Instagram and thought to write a short story based on this quote. My story has no  connection with Laini Taylor's novel and her work.






Friday, 29 January 2021

और हम बाकी लोगों का क्या ??

 कहानियां किसके बारे में कही जाती हैं ? कहानियों से क्या आशा की जाती है कि उन्हें हमेश हैप्पी एंडिंग या कोई स्टीरियो टाइप एंडिंग होनी चाहिए ? अनगिनत फिल्में और उपन्यास जो अब तक रचे जा चुके, उनमे हर उस संभावना पर एक विस्तृत कथा है जिसके होने की कहीं एक ज़रा सी भी संभाव्यता है। इस दार्शनिकता से परे क्या कभी कोई कहानी ऐसी भी हो सकती है जिसम कोई एंडिंग नहीं है जिसमे दो तयशुदा किरदार नहीं है ? जिसमे लवस्टोरी नहीं है !! जिसमे हेट स्टोरी भी नहीं है !! जिसमे कोई प्रवचन या आदर्श या बहादुरी की गाथाएं भी नहीं है !!! क्या ऐसी भी कहानी हो सकती है ? ऐसे लोगों की कहानी जो कहानी का किरदार होने लायक माने नहीं गए ?? क्या किसी एक इंसान की भी कोई कहानी  हो सकती है ? 




आओ ज़रा इसे थोड़ी आसान भाषा में समझें, यह फिल्म "The Holiday" मैंने अभी देखी  तो नहीं लेकिन इसके डायलॉग्स का एक इमेज मुझे इंस्टाग्राम पर कहीं दिखा और मैंने इसका स्क्रीन शॉट लेकर इसे रख लिया. यह फ्रेज कहता है कि  " Most love stories are about those people who fall in love with each other. But what about the rest of Us ? what about our story ?"

यह रेस्ट ऑफ़ अस कौन है ? यह वो लोग हैं जिनके पास  Each Other  कह सकने जैसा कुछ नहीं है।  वो सिंगल हैं ? पता नहीं !!! हमेशा से सिंगल हैं ? पता नहीं !!! कभी कोई Each Other  जैसी उनकी कहानी हुई थी ? पता नहीं !!! अब क्या चाहते हैं ? आखिर कुछ चाहते भी हैं या नहीं ?? जब मैंने वनीला कॉफ़ी लिखी थी तब शायद ऐसे ही किसी रेस्ट ऑफ़ अस के बारे में लिखना चाह रही थी मैं ??   "Eternal Sunshine of The Spotless Mind"  इसका भी एक डायलाग है जिसका स्क्रीन  शॉट लिया था मैंने, यह कहता है, "We met at the wrong time. that's what I keep telling myself anyway. Maybe, one day, years from now, we will meet in a coffee shop in  a far away city somewhere and we could give it another shot.


ये सारे अलग अलग टुकड़े हैं जिनको जोड़ कर एक अधूरी या कभी भी शुरू नहीं हुई कहानी को समझा जा सकता है या उसके एक मुकम्मल कहानी हो सकने का गुमान पाला जा सकता है।  एक और फिल्म है, हैनकॉक, विल स्मिथ वाली, जिसमे एक डिनर टेबल पर कन्वर्सेशन चल रहा है और अपने बारे में बताते बताते वो सुपर हीरो कहता है कि  "Nobody was there to Claim me." "Nobody" यह नोबडी का कुछ अर्थ है।  





इसे दुनियादारी के तराजू से देखिये।  एक बाज़ार है इंसानों का, रिश्तों का, सुपर मार्किट की तरह सब कुछ सजा हुआ है, हर कोई डिस्प्ले पर है, हम ही खरीददार हैं और हम ही दुकानदार।  हमने किसी को खरीद लिया या क्लेम  कर लिया। किसी ने हमको ख़रीदा या क्लेम किया। और जब कोई नहीं खरीदता या क्लेम करता तब हम उस ख्याल पर पहुँचते हैं कि  हमारी कहानी का क्या ?? रेस्ट ऑफ़ अस का क्या ??  तब हम खुद को ये बड़ी प्यारी सी तसल्ली देते हैं कि  यह गलत वक़्त था , यह गलत surroundings थी।  जब सही वक़्त होगा, सही सब कुछ होगा तब हम एक कॉफ़ी शॉप में किसी दूर अजनबी जगह पर मिलेंगे, जहां हमको गुज़रे वक़्त का कुछ पता ना होगा और तब हम नए सिरे से, नए शब्दों से, नए तौर तरीकों से फिर से एक शुरुआत करेंगे।  

एक और फिल्म है, "Meet  Joe  Black" . इसमें भी एक दृश्य है कॉफ़ी शॉप का।  यह बेहद दिलचस्प तरीके से फिल्माया गया है, इसकी कलर स्कीम और  किरदारों का ड्रेस अप  बेहद न्यूट्रल रंगों से तैयार किया गया है  लेकिन सुबह की चमकती रौशनी में यह दृश्य बेहद प्रभावी दिखाई देता है।  आप इसे एक टिपिकल हॉलीवुड रोमांटिक स्टोरी वाली फिल्म का वही घिसा पिटा  सा नज़ारा कह सकते हैं लेकिन मुझे ये दृश्य काफी अच्छा लगा। Meet Joe Black Scene

 इसका हर फ्रेम, संवाद आपको एक परी कथा जैसे रोमांस की शुरुआत  का यकीन दिलाता है।  और फिर दुकान से बाहर निकल कर दोनों किरदारों का बार बार मुड़  कर देखना;  यह सब कई बार अनगिनत बार हम हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों में देख चुके हैं लेकिन फिर भी इस नज़ारे को देखना  कभी भी पुराना या बोरिंग नहीं लगता।  इसलिए नहीं कि  यह कोई ओल्ड स्कूल किस्म की चीज़ है, बल्कि इसलिए कि  यह एक स्थापित आदर्श है, एक निश्चित उम्र का; उस उम्र का जिसमे "इमोशंस रन हाई" का नारा  दिया जाता है। यह एक दूर की कौड़ी है उस उम्र की जो ज़िम्मेदारियों और सामाजिकताओं के बंधन तले  दबी है।  यह एक ख्वाहिश है उस उम्र की जो राह तकती है किसी चमत्कार के घटित होने का।  जब कोई मुड़  कर देखे और आवाज़ दे, बुलाये। इसलिए ये दृश्य हमेशा उतना ही जीवंत और गर्माहट भरा रहेगा जितना हमारे दिलों में हिलोरें लेता प्यार।  

अभी  कुछ दिन पहले मैं हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप और विनोना रैडर के बारे में पढ़ रही थी।  नब्बे के दशक में जब देश दुनिया रॉक एन  रोल , डिस्को, पॉप, रैप म्यूजिक, मेटालिक म्यूजिक जैसे कई  नई  लहरों से रूबरू हो रही थी, जब जिप्सी और बोहेमियन होना अब भी एक  फैशन था, उस वक़्त में एक 26 साल का  जॉनी था और एक 18 साल की विनोना थी।  और एक किताबों के पन्नों से बाहर निकल आया रोमांस था। जिसमे सब वैसा ही  था जैसा किसी रोमियो जूलियट की कहानी में होता है।   एक कोई सिंड्रेला थी या स्लीपिंग ब्यूटी थी जिसे किसी राजकुमार ने ढूंढ लिया था। एक जादू था जो किसी परियों की रानी के महल की  चमकीली धूल के मन्त्रों से उपजा था।  लेकिन फिर चार  साल बाद जादू आखिरकार टूट गया।  एक हॉलीवुड स्टार  होना भी उस जादू को, उस कहानी को बचा नहीं पाया। इस कहानी ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया और फिर मैंने इससे जुडी हर खबर ढूंढ कर पढ़ी। उन दोनों के ज़िंदगियों में बाद के दिनों  के उतार चढ़ाव, सब पढ़ डाला   और आखिर कार इतना ही समझ आया कि, कहानी मुकम्मल होने के लिए  रुतबा, पैसा, प्रसिद्धि, स्वच्छंदता कुछ भी ज़रूरी नहीं। ज़रूरी सिर्फ इतना है कि कहानी हो, कोई क्लेम हो !! एक उम्मीद हो किसी दूर अनजान स्टेशन के कॉफ़ी शॉप पर दोबारा मिलने का एक बहाना हो।  रास्ते हों, रास्ते दिखें और रास्ते पर चलते जाने को एक कारण ज़रूर हो।  
अब इस वक़्त यह सब लिखते हुए एक और ख्याल आया कि यह तो एक ब्लॉग है जो इतना  आसानी से इस मुद्दे पर लिख पा रही हूँ, यदि कहीं ऐसी दो  लाइन कहीं फेसबुक पर लिख डाली होती तो  लोग सवाल जवाब का पूरा  संसार ही रच डालते।  यह रचनात्मक स्वतंत्रता इंसान को कुछ कोना उपलब्ध करवा देती है अपनी बात  कहने का। यह सोशल मीडिया के ज़रिये पिछले दो तीन दशकों से इंसान को जितने ज्यादा प्लेटफार्म मिले खुद को अभिव्यक्त कर सकने के या अपनी बात को दूर तक पहुंचा सकने के, उतना ही ज्यादा सिमट गया कही गई बातों का अर्थ। जब आप कह कुछ रहे हैं, सोच कुछ रहे हैं और लोग उसके अनेक अर्थ अनर्थ  किये जाते हैं। इसलिए कभी भी इस मुद्दे पर लिखने के लिए विचारों का तारतम्य बैठ ही नहीं पाया।  लेकिन इस बार यह रेस्ट ऑफ़ अस एक अजब ही सवाल बन कर आ गया।  

 जब दुनिया की हर चीज़ टेम्पररी हो चली  है, वायरल सेंसेशन की तरह सिर्फ कुछ घंटे या दिन का मामला रहा तब भी इंसान तलाश कर रहा है कि व्हाट अबाउट रेस्ट ऑफ़ अस ??? जब कहीं कोई अतिमानव भी यही पूछ रहा है कि No Claim ?? इन अधूरी छूटती जा रही कहानियों को पूरा होना चाहिए या नहीं !!!  या कहानी जैसा कुछ वहम  पाल रखा है लोगों ने ? क्योंकि यह सारा दिन फिल्म, टीवी, अख़बार, मैगज़ीन कुछ बाजार में बिक सकने लायक एक प्रेम कथा  के फॉर्मूले को हमें दिन रात सुनाते बताते रहते हैं तो हम लोग यह गुमान पाल कर बैठ जाते हैं कि लो हमारी कहानी क्यों ना हुई ?? क्या कहानियां सबके लिए नहीं लिखी रची जातीं ?? यहां मिनट मिनट पर कोई कहानी बताई जा रही है, इंस्टाग्राम भरा पड़ा है, अनेकों ख़ास आम कहानियों से, जिनके पीछे गहने, कपडे, मेकअप, लोकेशन डेस्टिनेशंस, बढ़िया खाना  और जूते बैग तक बिकने की आस में कहानियों का हिस्सा बन रहे हैं।  तब  इंसान पूछता है कि  हमारी कहानी क्यों नहीं लिखी जा रही ? ? क्या यह बिकने लायक या कहीं फोटो कैप्शन होने लायक कहानी नहीं हो सकेगी ?? 

Claims are not necessary !!! Romance is  a short time flick !!! There is no Dream Fairy tale story !!! 

Image Courtesy : Google 

Tuesday, 24 November 2020

लहसुन के बीच काजू

 लहसुन  के ढेर के बीच मैं एक काजू हूँ।  दिखता  भी हूँ  मगर पहचान में नहीं आता।  जानता हूँ कि  लहसुन गुणों की खान है, आम  आदमी का  खास सहारा है।  दवा है, स्वाद है , नुस्खा है, रौनक है सब है।  लेकिन मैं भी अपनी मर्ज़ी से काजू नहीं बना।  मुझे आलू गाजर मूली कांटा झाडी घास कुछ भी बनाया जा सकता था लेकिन कुदरत ने मुझे काजू ही बनाया।  यूँ मैं भी मीठे स्वाद की शान हूँ, मिठाई की रौनक और कीमत हूँ।  मेरा अपना जलवा है लेकिन मैं सिर्फ उन्हीं का साथी हूँ जो मेरी कीमत चुका सकें।  वैसे काजू बन पाना भी आसान नहीं था।  मेरे साथ के कितने बीज सड़  गए, फूल को पक्षी खा गए या फल निकला तो उसमे कीड़े लगे, कभी हवा उड़ा ले गई कभी  और कुछ।  इन सब में, मैं और मेरे कुछ खुश किस्मत साथी पूरा फल बने और समय आने पर खेत से मंडी  तक का  सफर तय कर  यहां  पहुंचे। बस यहां आकर किस्मत  पलट गई, बनिए की दुकान के बजाय मैं इधर लहसुन प्याज के ढेर पर गिर गया। और बस क्षण भर में मेरी जाति  बदल गई , अब मैं लहसुन हूँ।  लेकिन जब मुझे देख कर पहचाना जायेगा तब शायद खुश होकर खरीदार मुझे ये सोच  कर खायेगा कि लहसुन के भाव काजू मिल गया।  मुझे सब्ज़ी में नहीं डाला जायेगा, बस यूँही खा लिया जायेगा स्वाद बदलने की खातिर। इसलिए मैंने कहा ना कि काजू बनना मेरे हाथ में नहीं था।  फिर भी अभी के लिए लहसुन के ढेर के बीच मैं एक काजू यहां पड़ा हूँ।  यह सब लहसुन मुझे देखते हैं और बार बार इधर उधर ठेल देते हैं।  इनके लिए मैं घुसपैठिया, अतिक्रमणकारी और बाहरी।  और मेरे लिए ये अजनबी, विजातीय और अमित्र।  

लहसुन का दबदबा है, उसमे तीखापन है, तेज है और तुरंत असर है।  मैं ना फीका ना मीठा, ना तीखा न हल्का , ना गंध न रंग।  असर बस इतना कि कुछ कहते हैं कि सेहत के लिए फायदेमंद हूँ वैसे ऐसा कोई खास इसका प्रमाण नहीं पर मेरी बिरादरी वालों के साथ मेरी भी इज़्ज़त रह जाती है।  इसलिए तो कहता हूँ कि  लहसुन के बीच काजू होना बड़ा कठिन है, मैं अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा हूँ कि  कोई मुझे पहचान ले और मुझे  काजू के ढेर में रख दे। कैसा हो कि  लहसुन को काजू समझ के कोई खा ले और काजू को लहसुन समझ के सब्ज़ी में छोंक लगा दे या चटनी बना दे।  तब क्या पहचान बदल जाएगी ? क्या काम बदल जायेगा ? क्या रुआब बदलेगा ? 


Thursday, 10 September 2020

वनीला कॉफ़ी  --- 5 अंतिम भाग

 "ना जाने वक़्त की मर्ज़ी हैं क्या, क्यों हैं मिली ये दूरियां,  ओ मेरी जां "


"अब तुम अचानक से ये बात बता रही हो !!! पहले तो कभी तुमने इसका ज़िक्र भी नहीं किया।  रातों रात तो ये सब होता नहीं। तुम्हें इसका कैसे पता चला ? क्या तुम .... "
"चुप रहो तुम, फालतू के सवाल या कयास लगाने की कोई ज़रूरत नहीं। और मैंने कब कहा कि  रातों रात हुआ।  और तुम्हें कब बताती मैं ? और क्यों बताती ? तुम्हारे पास कौन सा वक़्त था ये सब सुनने का या किसी की मुसीबत को समझने का। "
"अब बिना बताये कैसे पता चल सकता है !!! मैं क्या कोई  अन्तर्यामी  हूँ जिसे अपने आप  भूत भविष्य  पता चल जाए." 
"पता चल भी जाए तो क्या कर लेगा इंसान।"

  "Sunayna, why on earth did you not tell me about this ? Why are you so introverted when it comes to your life and events."
"Introvert!!! you are  calling me an introvert !!!. Do you remember how many times I tried calling you, texting you ? but have you ever bothered to pick my call up ?  That fine early morning, when I called you to enquire about that Ayurvedic national institute and what you said.. you don't have  time to visit there, it was far from your work place and from your residence as well as. do you remember all that ??"
"Sunayna, I was actually busy, I wasn't making any excuses.. and even though you did the same with me a couple of years ago, you were also not picking my calls, not messaging me back; so what i did initially was just normal from my side. and as for that hospital thing, it is actually quite far and you know that cosmo city traffic... it will consume a whole day."
" fine then, Any other excuse do you have ?"
"it is not an excuse!!!"
"well, it is .. from my perspective, it is quite a good one. anyway, I am not asking for an explanation."
"Sunayna..."
"stop calling my name again and again. am I calling your name ?"
"why ? what is wrong in it ?"
"I don't like that. it sounds like you are dragging me in some sort of question answer session."


"ठीक है।" your Iron Curtain... and silent treatments were logical when applied to others but became irrational when others did the same to you. "


"Whatever it is.. it saves me from many uncomfortable situations." 

"Will you now tell me, what exactly happened ? and is this your reason for feeling miserable ?"

"Long story short, it was due to an internal injury, got hit by a vehicle, at first everything was fine, I was fine, minor bruises and cuts and then after a couple of weeks things strated getting bitter and tough. and then this decision was taken."

"and how an ayurvedic treatment was going to help?"
"they could have resolved the internal swellings or any wounds that were causing the ... the problem; at least this is what I was told by some people."

"Okay, let's not detail it. let's deal with it. let's think that it does not exist."

"I don't need any sympathy, it is not me who needs to think like this, it is the rest of the society, will they ever feel like this ? how am I supposed to marry or can have a family of my own?"

"You can adopt, of course with the consent of your ... alright.. I got it. But wait, Sunayana, the world is not that blanck or dull.. I am sure you will find a sensitive person. why do you not hope for good ?"

"because I don't want fake hopes."

"Anyway, next week , I am going back to delhi and then.. i don't know.  I will miss you Sunayna. will you remember me or not...?"

"I don't know... I don't want to keep a track of memories."

Four Months...

"Where are you ? why are you not picking up my calls? is everything ok ? are you alright ?"
"Sunayna, answer my question. this time I am actually asking a question." a message flashed on whatsapp screen and got seen after a couple of hours.
"I am at Dalhousie, it has been fifteen days since I am here. the internet and social media is not much allowed."
"what the hell on earth are you doing there ? and with whom you went there ? Sunayna , you ok ? tell me everything."

"relax, nothing to worry, do you remember, once I talked about visiting a place like Kothi or Sanavar .. a studio cottage .. here it is. It is a resort spa for those who want to heal themselves. and I am alone here, no one accompanied me here, no one brought me here, I came by myself."

"Are you happy ? is this your danube ? that Blue Danube?"

"I am still wandering.. I am looking for answers and lost pieces of the puzzle."

"shall I join you over there for the weekend, I am still in Delhi and not much occupied these days."

"No, I don't want to."

"Why ?"

"we all have our own journeys."
"What is that !!! ehh, can you ever be normal like normal people."
"it is normal, absolutely normal, as normal as playing pool and drinking beer in a pub."
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"तिशा, वापिस फोन कर रही है, क्या  जवाब दूँ ? तुम कुछ बताओ, उसका ब्वॉयफ़्रेंड तो जर्मनी चला गया बिना शादी किये। और अब मेरी फैमिली को   ऐतराज है।"

"मैं क्या कह सकती हूँ, मैं तो उसे जानती भी नहीं।  और मुझे इन सब मामलों की कोई ख़ास समझ भी नहीं। "
'अच्छा, तो तुम अपना बताओ, उस रिसोर्ट  से आने के बाद  अब आगे क्या ... ?"
"पता नहीं. बस कहानियां लिखने की कोशिश करती हूँ."
" कहानी  लिखने से ज़िंदगी चलेगी ?" 
"तो क्या नहीं लिखने से चल पड़ेगी ? तुम तो नहीं लिखते कहानी पर फिर भी अटके हो।   तुम क्या ढूंढ रहे हो ? तुम तिशा,  रिद्धि या वो हरिता किसी को भी नहीं ढूंढ रहे हो।  तुम अपने  फैसले की वजह ढूंढ रहे हो।  एक सही फैसले  के लिए एक सही और तार्किक वजह। तिशा वापिस आना चाहती है  पर क्या तुम उस मोड़ पर वापिस जाओगे या नहीं जाओगे या अब तुम कहीं और जा चुके हो ?"

"मैं कहीं नहीं जा रहा।  और तिशा से मैं बात नहीं करूँगा। अब इतना सब बखेड़ा करने के बाद उसको क्या चाहिए।"
"अगर ऐसा है तो तुम उसके बारे में मुझसे सलाह क्यों ले रहे हो ? अगर ये क्लोज्ड चैप्टर है तो इस पर विचार क्यों कर रहे हो ? क्योंकि अभी तक तुम इसे एक ओपन opportunity की तरह मान रहे हो ? है ना ?"

"नहीं, ऐसा कुछ नहीं सोच रहा मैं।"
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Three Months  .... 

"तो अब आखिर कुछ तो सोचा होगा ना तुमने। कहानी तो पूरी हो गई तुम्हारी।  अब ज़िंदगी की कहानी को आगे बढ़ाओ। सुनयना, तुम सुन  रही हो।"

"हाँ, मैं विएना के म्यूजिक फेस्टिवल का एक वर्चुअल कॉन्सर्ट  देख रही हूँ।  मैं सुन रही हूँ।"
"तुम कुछ नहीं सुन रही।  तुम कहो तो मैं तुम्हें कुछ अच्छा प्रपोजल बताऊँ, यहां मेरे कंपनी के कैंपस के पास वाले सेक्टर में में एक कंपनी में काम करता  ...."

"क्या उसे यह कॉन्सर्ट पसंद आएगा ? यह संगीत जिसकी भाषा अजनबी और शब्द अनोखे से हैं। "
"मैं समझा नहीं ?" 


"वादी के मौसम भी इक दिन तो बदलेंगे"




कहानी श्रृंखला समाप्त। 

Vanilla Coffee--Part 1


Thursday, 2 July 2020

वनीला कॉफ़ी - 4


ये वादियां, ये फ़िज़ाएं बुला रहीं हैं तुम्हें ......

Two months since then ...

"I am going to Dalhousie, do you want something from there ? shall I bring some souvenirs ?"
" I will be back in one week. "  a message flashed on whats app screen. 

"I don't want to bother you. I don't want anything." a short  text got typed.

"as you wish."

Four months...

"At least you can respond. such ego is not going to make your point better or superior."  another text flashed on facebook window. 
"I do not have any point anymore. and as you said those vanilla talks are useless, so why are you stretching this ?" 

Six months ...

" तुम आजकल कहाँ बिजी हो ? और वो तुम्हारे हॉलिडे ट्रिप का क्या रहा ?"
"कुछ नहीं, अकेले तो कहीं जा नहीं सकते और हर किसी का ट्रेवल हॉलिडे का अपना अलग mindset  है।  किसी को सस्ता पैकेज चाहिए किसी को ज्यादा दिन का। "
"तुम्हें क्या चाहिए ?" 
"मुझे बस एक कॉटेज या होम स्टे  चाहिए किसी दूर पहाड़ी जगह पर जैसे वो दीप्ति नवल का घर जिस लोकेशन पर है हिमाचल में, वो क्या नाम है !  हाँ, कोठी।  वहाँ से सुन्दर घाटियों के नज़ारे देखते हुए कुछ दिन गुज़ारे।"
" तो तुम्हें जाना  चाहिए। तुम किस  इंतज़ार  में हो ?"
"नहीं, मैं  फ़िलहाल कहीं नहीं जा रही।" 
"ये तुम्हारा हमेशा का जवाब है। "
"  मैं जाना चाहती हूँ  मुझे कोई ले जाने वाला नहीं मिलता। " 
" तो, तुम इस इंतज़ार में बैठी हो कि कोई तुम्हें लेकर जाए उन जगहों पर जो तुम्हारे पसंद मुताबिक हों ? ज़रूरी नहीं होगा कि  वो जगह, वो मौसम  दुसरे के पसंद मुताबिक हो। " 
"फिर ?" 
"फिर अब  मुझे  क्या पता ?" 
" तुम सोलो ट्रैवलर बन जाओ। क्या कहती हो ?"
"मुझे ये सब नहीं बनना, इतना कोई एडवेंचर नहीं करना। "
"तुमको तो डेन्यूब जाना था ? उसका क्या हुआ ?"

"हाँ जाना है। पता है, मैं चाहती हूँ कि  घर के आस पास एक अच्छा सा किचन गार्डन हो जिसमें  मौसमी  सब्ज़ियां और फल उगाये जाएँ, एक रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम हो  ओवरआल एक सेल्फ सस्टेनेड घर। "
"पहले तुम खुद तो सेल्फ सस्टेनेड बनो।  और किसी एक बात पर स्टिक रहो, कभी तुम कुछ प्लान करती हो कभी कुछ।  पहले तुमको डेन्यूब जाना था, अब तुमको हिल साइड कॉटेज चाहिए। और ये हार्वेस्टिंग वगैरह तो शायद नया आईडिया है तुम्हारा, पहले तो कभी कहा नहीं तुमने।"

"ऐसे ही सोचा,  ये भी एक तरीका है खुद को अपने आस पास से जोड़ने का। "
"आस पास से जोड़ने का !!!!  मतलब अभी  जुडी  हुई नहीं हो ??  तुम कितना ज्यादा सोचती हो !!!" 

"ये जगह कब ढूंढी तुमने ? कैसे पहुंचे यहां ?" सामने उस आर्टिफीसियल लेक पर नज़रें टिकाये पूछा।  
"ये बात बदल देने का हुनर तुमको गॉड गिफ्ट है ? या तुमने सीखा है , कोई कोर्स  वगैरह ? ऐसे ही एक दिन घूमते  ड्राइव करते इधर निकले तो दिख गया ये रिसोर्ट।  तुमको ऐसी ही जगहें पसंद है , इसलिए .... "

"मेरा काम अब यहां लगभग पूरा हो ही गया है। मुझे और मेरे उस सीनियर खरबूजे को  यहां जिस  नए प्लांट को सेट अप  करने के लिए यहां भेजा था  कंपनी ने, अब वो OPERATIONALIZE हो गया है ।  इसलिए अब नेक्स्ट वीक मैं वापिस जा रहा हूँ। "
"इतनी जल्दी तुम्हारे वापिस जाने का भी टाइम हो गया। कितने महीने हो गए तुम्हें यहां आए ? अभी चार पांच महीने पहले ही तो आये थे तुम ।" 
" चार पांच महीने नहीं, डेढ़ साल हो गया है मुझे यहां आए। अब तुम्हें तो वाकई कुछ याद भी नहीं है।"

"अच्छा, इतना समय हो गया !!! पता ही नहीं चला कब दिन गुज़रे। क्या तुम कुछ वक्त और नहीं  रुक सकोगे ? अब वापिस दिल्ली जाओगे या बैंगलोर ?" 

"फिलहाल तो दिल्ली, अभी एक प्लांट हरियाणा के पास लगा रहे हैं तो शायद वहां भेजेंगे, कुछ पक्का नहीं है।"
"फिर आखिर ज़िन्दगी में पक्का क्या है ?"
"पता नहीं।"

"तुम्हारे पास नहीं है ऐसा कोई प्लान या कोई ड्रीम ज़िन्दगी के लिए ?? या सिर्फ  वीकडेज़ और वीकेंड और इस शहर से उस शहर के बीच ही भाग रहे हो ? तुम किसी एक जगह को क्यों नहीं चुन लेते ?"

"तुम सोचती हो कि इन बड़ी कम्पनीज  में काम करने और कॉस्मो सिटी में रहने के कारण हम सिर्फ इन गिनी चुनी बातों में ही उलझे हैं ? यही लगता है तुम्हें ?"

" ज़िन्दगी के और भी चैलेंजेस हैं।  वर्क स्मार्ट रिटायर अर्ली !! वर्किंग नॉन वर्किंग स्पाउस , कितनी सारी  बातें  हैं।  financial security in old age and handsome savings for those times. I am probably going to Canada for a better career opportunity and a quick financial growth." 

"पर तुम तो अच्छी जॉब में हो और तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा वर्किंग या नॉन वर्किंग से ? नॉन वर्किंग हो तो भी तुम्हारा काम तो चल ही जायेगा। " 
"अब तुम सरकारी बाबू के पास  फिक्स सैलरी है और  फिक्स रिटायरमेंट के प्लान हैं।  लेकिन हमको सब सोचना पड़ता है।  समझी तुम !!!  और अब मैं ये अरेंज्ड मैरिज  वाले  सुनहरे सपने में नहीं फंसने वाला।  मैंने घर पर बोल दिया है कि  अब मैं इस कास्ट, लैंग्वेज, स्टेट जैसे किसी क्राइटेरिया को नहीं  देखने वाला। पहले ही इतना सब ड्रामा हो गया अब और कोई मेलोड्रामा नहीं चलेगा। "

"मतलब ?? लव मैरिज ही चाहते हो ना !! इसमें क्या बड़ा मुद्दा है ? यह तो उलटे आसान है, तुम्हें आसानी से कोई भी अच्छी, पसंद की लड़की मिल सकती है। मैंने तो ज्यादातर यही  देखा है कि  जो लोग कॉस्मो सिटीज में नौकरी कर रहे हैं वो ढूंढ  लेते हैं अपनी तरह बढ़िया नौकरी स्टेटस वाला कोई।" 

"जितना लग रहा है उतना है नहीं आसान। और हाँ, तिशा के बाद एक शार्ट हुक अप भी हुआ था,  पर हमारी  आपस में जमी नहीं।  उसको बहुत ज्यादा ही जल्दी थी, कुछ डिसाइड  करो,  फिक्स करो, so many commitments and expectations. तिशा भी यही करती थी, उसके पास हर चीज़ की एक प्लानिंग थी,  कौनसा काम मुझे करना होगा, कौनसी ज़िम्मेदारी उसकी होगी, मेड  का क्या सीन  रहेगा।  शादी के बाद गाडी कौनसी वाली चलाएगी ये तक  डिसाइड कर लिया था उसने लेकिन जो सबसे ज़रूरी बात थी वो उसने मुझे सिर्फ पंद्रह  दिन पहले बताई  शुक्र है कि  मैंने अपने ऑफिस में इनविटेशन कार्ड्स नहीं बांटे थे वर्ना  सेण्टर ऑफ़ तमाशा बन जाता मैं।" 

" and you shouted at me when I asked  about  your dinner date !!! ... anyways,  why don't you want any commitment ? what is wrong with it ? all women want some sort of commitments or responsibilities from their husbands or partners. Am I wrong ??"

"I think I need more time and energy to prepare myself to deal with all this shit again. I will rather prefer to stay single and enjoy life than binding myself in a melodrama again. Many people in my circle are planning for a luxurious old age home stay; they don't want this responsibility of marriage and children and rather ready for a single and easy going no responsibility life. Some are in Live-ins, some others are single and want to live a life of their own choices.  I too am thinking on the same lines.. let see, what is stored in future.. right now, my focus is on good earnings and a luxurious life.. I don't want to compromise on that front."
between,how much YOU know about this relationship and love and marriage thing !!!! how many expectations or responsibilities are you ready to take over ?? you never talk about your personal life, relationships or any Hook up, if any such thing ever happened."

"I ... I want commitments, responsibilities and ... I always wanted to but I may not be able to  fulfill ..."

"तुम इतनी कन्फ्यूज्ड सी क्यों हो गई हो ? क्या है जो तुम्हें इतना उलझा रहा है ?  तुम खुद तो ज़िम्मेदारी उठा नहीं सकती और मुझे समझा रही हो।"

"कुछ भी तो  नहीं है। ज़िम्मेदारी उठाना कोई ऐसी बड़ी  बात नहीं है, जितना तुम सोच रहे हो, पर कभी कभी ज़िन्दगी आपको इज़ाज़त नहीं देती।"
"अब फिर तुमने  फलसफा शुरू कर दिया। "
" ऐसा कुछ नहीं है।"
"तो क्या है ? बोल सकने की हिम्मत है तुम में ?  दूसरों की ज़िन्दगी में झांकना और सलाह देना और कुछ जज करना बेहद आसान है लेकिन अपनी ज़िन्दगी के परदे  खोलना बेहद मुश्किल है ना !!! डेन्यूब जाना आसान है सुनयना, कहानी लिखना भी पर बोल कर बताना मुश्किल है। " 

"क्या मुश्किल मानते हो तुम ?"
" जो तुम कह नहीं पा रही।"

"I may not be able to ... conceive .. may not be able to carry on the pregnancies and ..." 

"What the hell are you talking about !!! Are you in sense ? Sunayna, you okay ??"

"Yes, I am alright, I am all in my sense. you wanted me to raise the curtain, see, I did. I am not a coward; I am not hiding my weakness, I am not covering up my incompetency. I am not giving any goddamn excuse."
"shut up, you are out of your mind. Do you even know what you are saying ?? Are you reading some sort of tragic novels and such stuff ? what is that crap you are reading these days ?" 
"This is no crap, this is the fact, I am talking ... you said, I am judging you, you said I am arrogant and do not know anything about relationships. I do want to know, I do want to experience all that  crap. you shouted at me, when I asked about your dinner date; you said, I have no right to enquire about your personal life.  And now, you are asking me to raise the curtain of life; atleast, I didn't hesitate, I have courage to accept and speak out. I am not escaping from responsibility and commitment; it is just, will anybody be ready to commit with me, to fulfill my expectation ?? Do I even have a right of expectation, when I myself can't fulfill this biggest expectation of  a married life ?"

"Sunayna, why have you never told me about this ? you could have at least .."
"have you ever asked ? Are you even interested in all these miseries of others ? nobody wants to listen to the sorrows and miseries of others."

"You can find an understanding person, these days it is not as  such a big issue, at least to a certain extent ... so many latest technologies are there. You can go for treatments and ..."

"Shutup, Gaurav, it is not a disease nor an illness for which I should sought a treatment. it is a health condition and that's it.  accept or reject. nothing more, nothing less."

To Be Continued... 

Image Courtesy : Google

Part--3

Wednesday, 10 June 2020

वनीला कॉफ़ी -- 3

"दो सदियों के संगम पर मिलने आये हैं, एक समय लेकिन दो सदियां , दो सदियां ". 

"तुम गाने भी इतने बोरिंग और डिप्रेसिंग किस्म के गाती  हो कि  मेरा मन होता है  कि अभी यहां से भाग जाऊं !!"

"क्यों, इतना अच्छा गाना है।  तुम्हें क्या पसंद है ?"

"कुछ भी, थोड़ा lively, कुछ full  of spirit जैसा। "

"तो हाई स्कूल musicals कैसा रहेगा ? पर मुझे वो गाना नहीं आता। "

"अब मैंने हाई स्कूल musicals  के लिए तो नहीं कहा ना !!"

" खैर, तुम यहां इस छोटे शहर में क्यों आये ?"

"अब ये तुम्हारा छोटा बड़ा शहर बीच में कहाँ से आया ? हम लोग तो कुछ गाने की बात कर रहे थे। "

'लेकिन हम कोई अंताक्षरी नहीं खेल रहे कि  और कोई बात बीच  में नहीं कही जा सकती। "

"ओके, i  Surrender .  मैं यहां डेजर्ट सफारी के लिए आया हूँ, कंपनी ने मुझे पेड हॉलीडेज पर यहां भेज दिया।  मुझे कहा कि  भाई गौरव, तुम हमारे बड़े ही काबिल एम्प्लॉई हो  तो जाओ और ऐश करो। और बस, मैंने कहा कि  मुझे ये सूखा रेगिस्तान और ये पुराने  महल हवेलियां और ये शानदार हेरिटेज होटल्स देखने हैं, घूमने हैं तो उन्होंने मेरे लिए टिकट करवा दी और रहने को कुछ allowance भी  दे दिया।  गाडी मैं अपनी लाया ही हूँ।  " 

"बस इसलिए या और भी कोई  बहाना है तुम्हारे पास ?" 

"बहाना !!!! सुनयना, तुम क्या कोई खास बहाना सुनना चाहती हो ?"

"नहीं, मैं सिर्फ कोशिश कर रही हूँ कि  समझ सकूँ तुम्हारे यहां आने की असली वजह क्या है ? तुम्हारी अच्छी खासी कॉस्मो सिटी लाइफ के बीच ये ट्रैन का छोटा स्टेशन कैसे आ गया ? " 

"ऐसे ही,  यहां से  कुछ नए बड़े रास्ते भी निकल सकते हैं।"

 "आज हम मैरिएट जायेंगे। मैं बोर हो गया तुम्हारे इन हेरिटेज होटल्स का इंटीरियर देख देख कर। "

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"तुम, तुमको याद है कि एक बार तुमने मुझसे कहा था कि, तुम्हारे लिए मसूरी से थोड़ी बर्फ और पहाड़ लेकर आऊं।  पहाड़ का नज़ारा और पता नहीं क्या क्या कबाड़। 
"अब कबाड़ है तो तुम  क्यों याद कर रहे हो ? और मुझे क्यों बता रहे हो ? 

"पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है, सुरमई उजाला है, चम्पई अँधेरा है।"

"तुम्हारी वो एक्स .. फ्रेंड, रिद्धि   वो अभी वहीँ है या कहीं  दूसरे  शहर शिफ्ट हो गई ?"

"वो एक साल पहले ऑस्ट्रेलिया  चली गई। बात होती है  पर अब वो वहीँ सेटल्ड है  फ़िलहाल के लिए  और मैं  शायद कनाडा जाऊँगा अगले साल।  और कोई जानकारी चाहिए मोहतरमा आपको ? वैसे, आपका क्या चल रहा है, आप का क्या मूड है ? कब तक आप ऐसे कहानी लिखने में और कहानी का थीम ढूंढने में ....? "

"अब तुम अपनी असहजता को मेरी तरफ मोड़ रहे हो। तुम  अब तक चार या पांच  बार डेटिंग एंड मीटिंग एंड कोर्टशिप के किस्से मुझे बता चुके हो  और फिर भी मुझसे पूछ ऐसे रहे हो जैसे  तुमने बड़े  अच्छे ढंग से ..... "

"मैं  तुम्हारी तरह  खुद को दायरों में बिना वजह के क़ैद नहीं रखता।  सुनयना, तुम्हें नहीं  लगता कि  तुम खुद की ही खींची हुई  बॉउंड्रीज़ में बंद हो और बाहर देखना भी नहीं चाहती। "

"तो तुम्हारी तरह इस  टेबल से उस टेबल तक, इस मेनू कार्ड से उस मेनू कार्ड तक एक एंडलेस तलाश में घूमते  रहे ? ये ठीक लगता है तुम्हें ?"

"क्या मेनू कार्ड और कौनसी टेबल ? तुम क्या कहना चाहती हो ? तुम कहना चाहती हो की मैं यूँही टाइम पास कर रहा था और फ़्लर्ट कर रहा था !!!!!! और चार पांच बार कौनसा कैलकुलेशन किया तुमने ?? ज़रा बताओ ? किस किस की बात कर रही हो तुम ? अगर तुम रिद्धि की बात कर रही हो तो उस वक़्त हम लोग सीरियस थे पर उसके पेरेंट्स नहीं माने। जो कोशिश कर सकता था वो की ही थी।  तिशा  अपने बॉयफ्रेंड से शादी करना चाहती थी और ये उसने मुझे बहुत बाद में बताया जब ऑलमोस्ट सब फाइनल हो चुका  था। मैं इस अधूरे मन वाले रिश्ते को ज़िन्दगी भर नहीं झेल सकता था। "

"मुझे तो नहीं लगता कि  रिद्धि के लिए तुमने कोशिश की थी, वर्ना वो ऑस्ट्रेलिया क्यों जाती  और रही बात तिशा की,  तो तुम्हीं ने बताया था कि  उसने अभी तक शादी नहीं की है। "

"तिशा, अपनी ज़िन्दगी में आराम से है, किस से शादी करेगी, नहीं करेगी ये मेरा सिरदर्द नहीं  है। मेरी उस से कभी कभी बात होती है, पार्टीज में, पब में मिलते हैं कभी कभी।  बस। कोई ज़रूरी है कि  हम उसी रास्ते वापिस जाएँ ?" 

"तुमने  तिशा  से  नहीं पूछा, हो सकता है कि ... ?"

"सुनयना, तुम ये ज़रूरत से ज्यादा  ही फ़िल्मी कहानी बनाने की सोच रही हो। "

"मुझे लगता है कि, it was all your fault . And even after those experiences, you are still wandering and roaming around. It doesn't seem that you have learnt anything."

"What learnt, and what fault are you talking about ? what are you trying to say ? and what are those 4-5 times !!! will you please bother to explain ? I am losing my patience, be clear with your words. There is a limit for everything."

"How do I know, last month, you were talking about a dinner date and all ... I guessed you might have found a new girlfriend. am I right ?"

 "dinner date !!! I used to hang out with my friends and colleagues for dinner and parties; how can it be called a Date ?? and even if I am having a new girlfriend then how it is related with my past relationships ? However, Sunayana, I am not having any girlfriend these days. How did you reached to this conclusion of wandering and all ?"

"And if you are trying to blame me for all those things which were out of my control or where I had a little role to manage the situation then it is your own bias, your own judgmental mindset. You have always been rude and harsh with me; you think I am some sort of romeo ... is this what you think about me ??? I do not expect any answer." Anger mounted in his mind and a flow of unexpected thoughts rolled out from his mouth.

"I never wanted to say this, thought it will hurt you and I really never wanted to do that. But I think if you continued this type of behavior;  this being rude and judgmental to other people's lives and giving your half-baked opinion  on their relationship matters, provided that you never had been in any relationship before; how can you even imagine or understand about all this love and romance and emotions that get attached with all these things."

"What do you mean by rude, harsh and judgmental ?? I was trying to understand... why are you venting on  me ? what wrong did I said ? was it so wrong to ask  about your past relationships ?"

"You don't want to understand, you only want baseless allegations and negative points. we better not talk about this, I already said you won't be able to handle it;  but Sunayana, you are not a little kid. And with this arrogance, I fear you will end up destroying your future if ever happened relationships, in fact you will ruin things with your judgmental attitude." 

"I never thought my words are hurting you this much. I bothered you a lot. I was not aware..."

"Yes, it does hurt when you speak such harsh words. And these useless vanilla talks are useless, why the hell did you started it, why are you interested in my relationships." His voice tone was rough.

"I will not bother you from now onward, I want to go home." With a choking voice she spoke. 

"Ok."

"Can't I get a cab or auto ?"

"What cab auto you want !!!! we came here together and I will drop you home. Get in the car. "

"No, I will go myself." Moist eyes yet a firm slow voice.

"Don't create scene here and get in the car." Every word was spoken with a strong tone.

 "Will you not stop crying?" His anger was now turning into frustration and helplessness.

With this question the timid sound of tears stopped. A harsh silence prevailed between them.

She turned her face towards window and set her gaze in a vacuum. The car was running at a faster pace and so does the feelings of heart.

"Say something, Sunayana ...."

"Being quiet and bearing with this was an easy thing." he murmured and stared hard at the road.

finally, the destination arrived. She got out of the car and stepped towards the gate. With a decision of Not Bothering Back.



To Be Continued ...

Part 1
  







Monday, 25 May 2020

जगाये रखने के सफर पर 


अब याद कुछ नहीं आता। याद करते , याद रखते, मैं  भी थक गई। याद का ठेका अकेले मेरा तो है नहीं।

मुझे अब कोई याद नहीं करता। मेरे बारे में वे every small little things भी अब कोई नहीं बताता, जानता। और मुझे इसमें कुछ भी नया, अनोखा, अजब नहीं लगता।

यह बरसों की याद, शताब्दियों का संसार और रिवाज हैं। यह इक्कीसवीं शताब्दी के शुरुआती दशक हैं। ये प्रयोग और अनुभव के दिन हैं, लकीरों को लांघने के दुस्साहस के सफर हैं।

और मैं याद रखने और याद आने के कारोबार पर मिट्टी बिछाती जा रही हूं। क्या कोई देख रहा है ? कोई जान रहा है कि मिट्टी की परत हर रोज एक अंगुल ऊपर उठ रही है?
मैं लकीरों और  उनकी बनाई ज्योमेट्री को मिटोरती जा रही हूं। यह उत्तर होगा उस औपचारिक याद को जो यदा कदा शिष्टाचार वश या दिखावे वश जागती है। जिसकी उपेक्षा करने के लिए सहस्त्राब्दी का इंतज़ार करना होता है।

और फिर मेरी आँखों में नींद भर आती है। यह आभासी सत्य पर विश्वास करने के दिन हैं।
मेरी नींद इस सतरंगी आभास में फिर से खुलती है। यहां हर निषेध एक निमंत्रण है, मुझे याद दिलाने के लिए कि मेरा स्वागत है, नए सफर पर नई शताब्दी में नए परिचय के साथ।