Friday, 22 November 2013

एक ब्लॉगर की दुखभरी कथा

Sensible  तो बहुत लिखा है मैंने, आज सोचा कि कुछ Nonsense भी लिखा जाए. कुछ Idiotic , Stupido , Silly, Absurd, Foolish, Imbecile,  किस्म का लिखा जाए.  अब इसकी वजह ना पूछिए, क्योंकि जवाब इसका सीधा सा ये है कि हम  बोर हो गए हैं, जी हाँ सही पढ़ा आपने "बोर".

बोर हो गए हैं इस ब्लॉगिंग से. कितनी मेहनत  से लिखते हैं, मगर क्या फायदा, कोई पढ़ने वाला ही नहीं, कितना ज़ुल्म है ये एक लेखक पर कि वो अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का परिचय दे रहा है और कोई देखने पढ़ने सुनने वाला ही नहीं (लानत है ).

रुकिए ज़रा, शायद आप मुझे ये उपदेश देना चाहेंगे कि आजकल जिसे देखो ब्लॉगर बन गया है और ज़रा सा कुछ ऐसा वैसा चार लाइन लिख के खुद को लेखक मान बैठा है. जिसे देखो नई  नई   कविता रच रहा है, कोई हाइकू तो कोई काइकू (ये भी काव्य की  एक विधा है, एक श्रीमान है जो प्रतिदिन फेसबुक के एक पेज पे अपना काइकू  छापते हैं )  तो कोई गीत लिख रहा है. यानि हिंदुस्तान में साहित्य का भविष्य अति उज्जवल है और जब इतनी सारी  प्रतिभाएं मैदान में है तो ज़ाहिर है कि केवल बहुत अच्छा लिखने वाले को ही तो अटेंशन, अवार्ड, रिवॉर्ड  मिलेगा बाकी तो सब संघर्षरत, upcoming , budding वाली केटेगरी में ही संतोष कर सकते हैं.

पर खैर ये इंटरनेट है, संसार में ऊपर ईश्वर है और  नीचे गूगल है अर्थात सर्वव्यापी, सर्वसमर्थ, सर्वज्ञानी, ध्यानी और संगी साथी सब कुछ है. दुनिया में मुझ जैसे निरीह, संसाधन विहीन, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लेकिन प्रतिभावान लोगों की पीड़ा को गूगल ने ही समझा और ब्लॉगिंग की  सुविधा उपलब्ध करवाई। (जय हो गूगल महाराज की). अब यहाँ तक तो ठीक है कि सुविधा मिल गई लिखने की और across  the  globe  पहुँचने की भी. पर भाई, खाली ब्लॉग पर पोस्ट कर देने से क्या होता है, खाली फेसबुक पर लिंक पोस्ट करने या एक पेज बना देने से भी क्या होता है ??? कुछ भी नहीं होता, बिलकुल नहीं होता।


आप भूल रहे हैं कि ये विज्ञापन, प्रचार प्रसार का युग है.  बढ़िया पैकिंग और उसकी मार्केटिंग का युग है, इसी बात को ध्यान में रखकर गूगल ने ब्लॉग पर फॉलोअर  का आप्शन दिया, फेसबुक ने भी लाइक्स, फॉलोअर के आप्शन लगा रखे हैं. लेकिन श्रीमान रुकिए, ठहरिये, ये फॉलोअर, कमेंट्स और लाइक्स ऐसे कैसे मिल जायेंगे,  सीधा सादा  give and  take  वाला मामला है. और इसी बात को ध्यान में रखते हुए blogadda , indiblogger , संकलक, हमारी वाणी, ब्लॉगोदय वगैरह websites हैं. जी हाँ, मैंने भी इनकी सदस्यता  ले रखी  है और मुझे इनसे कोई शिकायत भी नहीं (हो भी तो किसी की सेहत को क्या फर्क पड़  जाएगा) शिकायत तो मुझे तब होती है जब मैं इन साइट्स पर बेहद बकवास किस्म की तुकबंदी जिसको कविता या कहानी कहा जाता है या कुछ भी बेसिर पैर की  तस्वीर  पर होने वाली कमेंट्स और वोटों की  बारिश को देखती हूँ. (हाँ आप कह लीजिये कि मुझे उन लोगों से बड़ी जलन हो रही है, क्यों आपके ख्याल से नहीं होनी चाहिए क्या ) ज़रा सोचिये indiblogger  पर पचासों जाने अनजाने लोगों को वोट करने के बाद भी जब मेरी पोस्ट पर गिनती के वोट आते हैं या आते ही नहीं तो मुझे कैसा लगता होगा। कई बार बिकुल औसत या बोरिंग सी कहानी पर भी तारीफों की बाढ़ आई रहती है और मेरी कहानियाँ और निबंध बेचारे शायद औसत की श्रेणी से भी बाहर है. (थोड़ी सहानुभूति जागी ?? )

उस पर तुर्रा ये है कि कविता और हाइकू  लिखने वालों ने अच्छा खासा स्पेस घेर रखा है, मेरे ख्याल से दो तिहाई लोग तो सिर्फ कविता ही लिखते और पढ़ते हैं (शायद सोते बिछाते भी हैं). अब कविता के लिए रोज़ रोज़ नए विषय आ नहीं सकते, इसलिए रो पीट के वही रोमांस का खाता खोल के बैठ जायेंगे या बिरहा का गीत गाया  जाएगा या कोई भूले बिसरे दिन याद कर रहा है. (उम्मीद है किसी कवि की नज़र इस पर नहीं पड़ेगी वर्ना उनकी काव्यात्मकता आक्रामकता में बदल जायेगी)

लेकिन इस सबका एक मजेदार पहलू भी है,  पता नहीं आप में से कितने लोगों ने ध्यान दिया है या शायद ना भी दिया हो. पर एक सीधा सा तरीका है कि भाई अगर किसी ने आपके पोस्ट पे कमेंट किया या वोट किया है तो श्रीमान/सुश्री/श्रीमती जी, ज़रा शिष्टाचार दिखाइये और … जी हाँ, ये एक किस्म का शिष्टाचार ही है, वर्ना किसके  पास टाइम पड़ा है कि आपके लिखे को पढ़ने के लिए अपनी आँखें स्क्रीन पर खपाए। और फिर क्या आप नहीं चाहते कि आपके ब्लॉग पर फॉलोअर्स की  एक लम्बी लिस्ट दिखे, हर पोस्ट पर इत्ते सारे कमेंट्स आये, फेसबुक पर फैन हो और ये हो, वो हो (पता नहीं क्या क्या हो )  (समझदार को इशारा काफी है, बेवकूफों का इलाज नहीं है)  पर आप कहेंगे कि इसमें ऐसा क्या मजेदार है, ये तो साधारण बात है.  

ख़ास बात है कमेंट्स की भाषा। ... अगर हिंदी के ब्लॉग हैं (उसमे भी कविता के मरीज़) तो कमेंट्स इस तरह आते हैं … अत्यंत मार्मिक, मर्मस्पर्शी, अत्यंत भावपूर्ण, अर्थपूर्ण, अत्युत्तम, सार्थक अभिव्यक्ति और सिर्फ ये भारी भरकम विशेषण ही नहीं इनके साथ शुद्ध हिंदी की  वाक्य रचना, जिसे पढ़कर कई बार मेरी हिंदी भी इम्प्रूव हो जाती है.  और मामला यही नहीं रुकता,  वाक्य के अंत में कई लोग सादर, आभार भी जोड़ देते हैं. और यही एक चीज़ मेरे पल्ले नहीं पड़ती कि हर बात के लिए आभार का भार उठाने की  क्या ज़रूरत ? अगर किसी ने आपके पोस्ट पर कमेंट किया तो उसका आभार तो समझ आया पर हर बात में बिना बात में भी आभार और सादर की पूंछ और पुछल्ला !!!! तब मेरा मन करता है कि  इस आभार को सादर सर पे दे मारा जाए. (कुछ तो इस्तेमाल हो ये भारी  भरकम शब्द) जाने क्यों ऐसे समय में अंग्रेजी ज्यादा अच्छी लगती है, शायद इसलिए कि उसमे एक औपचारिकता का भाव है, बेवजह हर बार कमेंट में  Thank You और Regards  जैसे शब्द आमतौर पर नहीं लिखे जाते जबकि हिंदी में इनका इस्तेमाल  एक फैशन की तरह  हो गया है और इसीलिए ये "आदर सहित, सादर और आभार"  के  शब्द बोझिल लगने लगते हैं. (हिंदी की  बुराई नहीं कर रही, पर हर जगह शुद्ध हिंदी का हथगोला मारने वालों को मेरा निवेदन है कि भाई कभी कभी अंग्रेजी से भी काम चला लो क्यों हर बार, हर बात में हिंदी के शब्दकोष को खंगालते हो)

पर खैर, अंग्रेजी के ब्लॉग्स में भी कम ज्यादा यही स्थिति है, फर्क सिर्फ इतना कि वहाँ भाषा ज़रा अनौपचारिक किस्म की होती है, बाकी वही कमेंट बैक-कमेंट, वोट बैक-वोट का ही सारा किस्सा है. पर अंग्रेजी ब्लॉगर्स  को एक फायदा है, ज्यादातर ऑनलाइन लेखन प्रतियोगिताएं (कांटेस्ट) जिनमे सच में बड़े अच्छे  इनाम मिलते हैं ( cash and goodies) वो सब अंग्रेजी में लिखी पोस्ट्स के लिए हैं. हिंदी वालों को उसमे कोई स्कोप नहीं। (यह अत्यंत दुःख का विषय है)

चलिए जी, बहुत कह लिया, निकाल ली अपने मन की  भड़ास, बहुत दिनों से मन में ये सब चल रहा था. हाँ हाँ आप कह लीजिये कि जलखुकड़ी होना अच्छी बात नहीं पर अब क्या करू, इतने जतन  किये मैंने, जाने किस किस  अजनबी के ब्लॉग्स को पढ़ा; फिर कमेंट्स भी किये, वोट भी किये, उनको फॉलो भी किया पर उसका सुफल उतना नहीं मिला जितना मिलने की उम्मीद थी. खैर, ये जलन भी अब पुराना किस्सा हो गई, अब हमने मोह माया त्याग दी है. (हारे को हरी नाम, You  See)  देखा जाए, तो हम सब इस खेल को समझते भी हैं और जानते भी हैं और फिर Recognition किसे नहीं चाहिए; इसलिए ये अजीब किस्म का उबाऊ खेल (वोट, कमेंट वगैरह) चलता रहता है. 



( मैं जानती हूँ और मानती भी हूँ कि ब्लॉगिंग की दुनिया और यहाँ लिखा जाने वाले  कंटेंट का एक significant  हिस्सा इस खेल की सीमाओं से नहीं बंधा, लोग पढ़ते और सराहते हैं क्योंकि सचमुच बेहतरीन चीज़ें लिखी जा रही हैं पर इस "अजब गज़ब वाहवाही" वाले    खेल को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता )


Image Courtesy : GOOGLE

36 comments:

Rajanikant Mishra said...

ha ha mazedaar hai... "मेरे ख्याल से दो तिहाई लोग तो सिर्फ कविता ही लिखते और पढ़ते हैं (शायद सोते बिछाते भी हैं)"

Bhavana Lalwani said...

:P :) thnk u

Yashwant Yash said...

बिलकुल सही बात उठाई है और यह भड़ास निकलनी ज़रूरी भी थी।
मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि-

1---मेरा अपना मानना है कि ब्लॉग एक ऐसा माध्यम है जो हमारी अभिव्यक्ति को एक मंच प्रदान करता है। पर अफसोस तब होता है जब लोग अपने लिखे या अपने ब्लॉग की सफलता का पैमाना पोस्ट पर आने वाले कमेंट्स को मान लेते हैं बल्कि कमेंट्स के आदान-प्रदान को ब्लोगिंग के शिष्टाचार से भी जोड़ देते हैं ( मेरे पास इसका साक्ष्य भी है)।

2---हमे सिर्फ लिखना चाहिए और लिखते रहना चाहिए कोई उसे कविता कह सकता है,कोई कहानी,लेख या गद्य और पद्य का मिश्रण। यही बात ब्लॉग पर पॉड कास्ट और साझा किए गए चित्रों और आलेखनों पर लागू होती है।

3---हमने ब्लॉग बनाया है हमे उसे एक मंच की तरह इस्तेमाल करते रहना होगा बिना किसी और बात की परवाह किए।

4---एक लेखक के तौर पर एक ब्लॉगर जहां कुछ भी लिखने कहने या प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र है वहीं एक पाठक के तौर पर यह उसका विशेषाधिकार भी है कि वो किसी पोस्ट को पढे या नहीं पढे,टिप्पणी दे या नहीं दे और अगर टिप्पणी दे तो किन शब्दों या भाषा मे दे।
असंसदीय भाषा वाली प्रतिक्रियाओं पर लगाम कसने के लिए ही कमेन्ट मोडरेशन और डिलीट करने की सुविधा बहुत पहले से उपलब्ध है। किसी कोई टिप्पणी नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि किसी ने आपका ब्लॉग नहीं देखा ,हर समय दुनिया के किसी न किसी कोने से हर ब्लॉग को कोई न कोई देख ही रहा होता है।

अतः ब्लोगिंग के इस मंच का जितना अधिक सकारात्मक उपयोग किया जा सके करना चाहिये।

सादर

Vikesh Badola said...

मैं खुद को पहले वाले आपके भड़ास के भाग से जोड़ूं या जो आपने आखिर में नीचे ब्रेकेट में लिखा है उससे जोड़ूं। मैं तो ज्‍यादातर शुद्ध हिन्‍दी ही लिखता हूँ। मुझसे तो निराश नहीं है ना आप, हैं तो माफी चाहूंगा। आप निराश न हों आप लिखते जाइए। आपके लिए शुभकामनाएं।

Bhavana Lalwani said...

agree sent percent par fir ye saadar ki sadari kyu taang di.

Bhavana Lalwani said...

hahahahaa... ji shukriya. aap jis hisse mein chaahe us me jud jaaiye .. maine toh post k search description mein pahle hi likh diya hai ki "its a random blabber of an angry mind" isliye aasha nirasha ka sawaal hi nahin. aur fir shikayat unse hai jo comment nahi karte .. aap se nahin :)

Indrani said...

Blogs are best place to express yourself, it is okay to be angry here.

Yashwant Yash said...

'सादर' मेरा ट्रेडमार्क है। आपने देखा होगा लगभग सभी ब्लोगस पर मेरे कमेंट्स में सादर शब्द ज़रूर लिखा रहता है जो उस ब्लॉग पोस्ट को लिखने वाले के प्रति सम्मान प्रकट करने का तरीका है। क्योंकि मेरा मानना है कि मेरे अलावा जो भी लिखने वाले हैं वह अनुभव ,आयु और रचनात्मकता मे मुझ से बड़े हैं।

सादर

Yashwant Yash said...

कल 24/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Bhavana Lalwani said...

hey ram yaani is is se peechha nahi chhootega

Bhavana Lalwani said...

thnk u

Abhar Saadar :)

Bhavana Lalwani said...

yuppp I agree .. its the best medium to speak, to shout or to scream :) :)

Vikesh Badola said...

कार्टून के बारे ये कहना भूल गया था कि ''यह बहुत अच्‍छा लगा'', पर आज की आधुनिक दुनिया में फ्रेक्‍शन्‍स ऑफ सेकंड्स में बातों को भूलने की बीमारी भी तो लगी हुई है मुझ जैसों को।

Bhavana Lalwani said...

ise bhoolna nahi kahaa ja sakta kyonki der s ehi sahi aapko yaad toh aa gaya .. thnks

निहार रंजन said...

आपने तो आज ना जाने कितने दुश्मन बना लिए होंगे :) अब बस आपके सच्चे पाठक रह जायेंगे. मैं तो बस कविता लिखने का प्रयास करता हूँ लेकिन जिस तरह कवियों की धज्जियां आपने उड़ायी है उससे मैं आहत नहीं हुआ. क्योंकि जो लिखा है है वो बिलकुल सच लिखा है. मार्केटिंग के इस युग में कृत्रिम प्रकाश से अपनी चीजों को चमकाया जा सकता है लेकिन समय की परीक्षा में टिकती है वही कवितायें जिसमे गुणवत्ता हो. तभी तो दिनकर, बच्चन , गुप्त आदि जैसे कवि की किताबें हम आज भी खरीदते हैं.

कई बार लोग बस पढ़ कर निकल जाते हैं. रचना के लिए आत्म-उर्जा ही एक भरोसेमंद स्त्रोत है. टिप्पणी की संख्या पोस्ट की गुणवत्ता का परिचायक नहीं और ना ही उनकी कमी. आप बस लिखते जाइए :)

debajyoti said...

Wasn't able to save my comment earlier. All i want to say is that I absolutely loved this post! and while reading a post only when that blogger comments on our blog, we come across such lovely posts.

Bhavana Lalwani said...

hehehhe.. dhanywaad sir, mujhe bhi pata hai ki main kuchh jyada hi likh gai par kya karu gussa aaya hua tha toh socha likh do aage dekha jaayega .. aur mere khyaal se ab paathak milenge hi nahi :) :) .. keep in touch.

Bhavana Lalwani said...

hey Deb nice to see u here .. thnks fr yr feedback, I agree wid u :) :)

निहार रंजन said...

ह्रदय के उद्गार को यथारूप रखकर अच्छा किया. पोस्ट की तीक्ष्णता और तल्खी दोनों ही बहुत संयत और अच्छे है. कृपया 'सर' न कहिये. बहुत बोझ वाला शब्द है यह.

Bhavana Lalwani said...

thnkss a lot ..

Onkar said...

आपने सोचने को मज़बूर कर दिया

Bhavana Lalwani said...

dhanywaad ...

Amit Srivastava said...

एक ब्लॉगर नहीं सभी ब्लॉगर का दर्द है यह ।

Amit Srivastava said...

http://amit-nivedit.blogspot.in/2010/11/blog-post.html

Bhavana Lalwani said...

shayad isliye is post ko itne comments mile hain varna toh akaal pada rahta hai (kanya rashi hone k baavjood) :)

aliasgarmukhtiar mukhtiar said...

interesting read

कविता रावत said...

ऐसा भी होता है चलता रहता है ...अच्छी प्रस्तुति

Bhavana Lalwani said...

thank u :) :)

Saru Singhal said...

Addressed this issue multiple times on my blog. We need feedback to stimulate. I won't comment on someone's writing as I am not a professional but reading-feedback should be honest.

Bhavana Lalwani said...

I agree wid u Saru .. but wat to do, sometimes we write wid lot of passion bt dnt evn get readers let apart the feedback.

रश्मि प्रभा... said...

डायरी
अनकही बातों की
अनकही सोच की
अनकही मुलाकातों की
अनकहे रिश्तों की - ख़ास दोस्त होती है
अगर दोस्त को सम्भाल के रखो
तो वह दोस्ती निभाती है
किसी से कुछ नहीं कहती
पर सहनशीलता की हदें टूटने लगे
तो डायरी अपने पन्नों की सरसराहट में
सबकुछ कहती है
अनुमान के कांच तोड़ती है डायरी
हंसी के पीछे छुपे दर्द की कराहटें कहती है डायरी …
http://www.parikalpnaa.com/2013/12/blog-post.html

anitaexplorer said...

Gem of a Post, Bhavana. :)
I read an entire Hindi Post after long! I must say that you write really really well!
Your Post appeals as it is so brutally honest. I love honesty & people say my Posts also reflect the same...
I can feel very word has been written from the heart- Ekdum Dil Se! I have felt all this and more in the last couple of months since I have joined IndiBlogger & BlogAdda. I can connect with you as I have really tried and felt all what you have mentioned! :)
Keep Blogging, dear!
Am sure some day we'll be truly Famous & everyone will know us!!! :)

Bhavana Lalwani said...

Thanksss a million Anita, u made my day :) :) :) yeah I did not try to hide my feelings while writing this post. May your words come true soon. Thanks again.

Pritesh said...

hahahaha...
it's an awesome satire on Blogging Network. Likhne wale bahut hai, padhne wale kam, aur jo padhte hai wo bhi apni link chipka ke jate hai, matlab padhne wale isliye padhte hai taaki aap unko padh sako..... Genuine blog readers thode kam hi hai! I guess each blogger can relate him/her self with every point you have written.....
I am also on Indiblogger and felt that sometimes people vote for your entry just because they are in your network and it's a "Social Courtesy"...may be they have not read your post...but they "LIKED" it !

Anyways we write just to put our thoughts on record and if someone read and likes, it's good, and not then also good!

Bhavana Lalwani said...

Thanksss a lot tht U liked it and yes you have made the right point.. be it indiblogger or any other blog aggregator people are voting and commenting on various blogs so thy cn also get the same. and yes I too hate this system of pasting links of "My New Post" this is seriously rubbish, its like we are advertising our post and indirectly saying "read and comment on my post or next time dnt expect me to come back to yr blog".

Anita said...

Bhavana,
I quoted you & your Post in my latest Post on Blogging & "Votes & Comments"
Do read :)
I am actually posting my BlogPost's link :)
Do read:)

http://anitaexplorer.blogspot.in/2014/05/votes-comments.html