इस बार फिर से उसी पुराने मुद्दे पर लिखना का मन हुआ. अब आप इसे बात को बार बार दोहराना कह लें, बेकार की बकवास कह लीजिये या एक फ़्रस्टेड दिमाग का कचरा … जो मन में आये सोचिये, मैं परवाह नहीं करती। तो मुद्दा वही है "एक ब्लॉगर की दुःख भरी कथा". लेकिन इस बार गुस्सा इस बात को लेकर है कि ये जो ज़माने भर के ब्लॉग संकलक या फोरम या मंच ब्लॉग बने हुए हैं ये आखिर किसके काम के हैं ??? यहां किन लोगों को जगह मिलती है, जहां तक मैंने देखा है कि वही कुछ गिने चुने नाम हैं जिनको हर दुसरे तीसरे दिन किसी ना किसी मंच पे देखती हूँ (एक कारण ये भी है कि इनमे से कई लोग डेली बेसिस वाले लेखक हैं, भगवान जाने इनकी कल्पनाशक्ति और अति सृजनात्मकता का रहस्य क्या है जो हर दूसरे दिन कोई आईडिया मिल जाता है लिखने को) खैर, इस बात पर तो कोई क्या ईर्ष्या करे.
सवाल मेरा सिर्फ इतना है कि ये सारे ब्लॉग लिंक संकलक करते क्या हैं ? क्या सिर्फ इनकी दिलचस्पी कविता, छंद, बंद तक है या किसी क्षेत्र विशेष से ही प्रेम है जो "बाहरी" लोगों को इनके यहां प्रवेश नहीं मिलता। फेसबुक पर कई पेज/ग्रुप हैं जहां ब्लॉगर्स अपनी लिखी रचना के लिंक पोस्ट करते ही हैं, तब फिर उनमे से कितनों को जगह मिल पाती है इन फ़ोरम्स में ?? कभी मिलती भी है ????? मेरा अपना उदाहरण देना चाहूंगी, इसलिए नहीं कि हाय राम मेरी पोस्ट को शामिल नहीं किया इसलिए अब इनको गालियां देनी ही हैं, मगर इसलिए कि जो घटना हुई उसने बहुत गुस्सा दिलाया (और मुझे गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता है, बाद में भले ही सोच विचार करूँ पर उस वक़्त तो …) लेकिन इस समय सोच विचार का नहीं गुस्से का ही मन है. शायद यही गुस्सा रहा होगा दिमाग में जब करीब दो महीने पहले एक ब्लॉग लिंक संकलक के फेसबुक पेज के एक पोस्ट पर कमेंट किया था कि भाई कभी मेरी भी पोस्ट को शामिल कर दिया करो (वैसे उन भले लोगों ने एक बार, जी हाँ एक बार तो लिया ही था मेरी पोस्ट को और बड़ी मेहरबानी उनकी कि उस लिंक अप की वजह से कुछेक कमेंट्स भी आये पोस्ट पर ) तब जवाब यही मिला था कि देखिये फलानी तारीख को फलाने ब्लॉग पेज पर आपकी रचना है. पर पूछती हूँ कि क्या उसके पहले कभी लिखा नहीं था या उसके बाद कभी लिखा नहीं ??? कम से कम हम ब्लॉगर्स इतनी तो उम्मीद रखते ही हैं इन "चर्चा वाले ब्लॉग्स" (जैसा कि यशवंत जी ने सही नाम सुझाया है) से कि कभी कभार "हम जैसे कम जाने पहचाने या शायद बिलकुल अनजाने लोगों" के लिखे को भी शामिल कर लो. बार बार उन्ही लोगों को शामिल कर के कौनसा तीर मारा जा रहा है जो आज इस फोरम पर तो कल किसी और फोरम पर शोभा बढ़ाते ही है. जिनकी रचना की तारीफ़ के पुल, सड़क, रनवे का कोई अंत आलरेडी नहीं है उनको बार बार हर फोरम पर दोहराने का क्या फायदा। जिनके पास पहले ही ढेर सारे फॉलोवर्स हैं, उन्ही को अगर हाईलाइट कर रहे हैं क्या बड़ी बात है.
सवाल ये भी नहीं उठा रही कि इतनी इतनी बार आप के ब्लॉग संकलक को विजिट करने, वहाँ कमेंट करने के बाद भी आप लोग जहमत नहीं उठाते ये देखने की कि क्या कोई और ब्लॉगर्स भी हैं जिनके ब्लॉग्स को शामिल किया जा सकता है ?? क्या आपके हिसाब से भारत के कुछ क्षेत्र विशेष ही हैं जहां से पोस्ट लिंक लिए जाने चाहिए ?? और कुछ फ़ोरम्स का सारा प्यार तो जैसे कविता पर ही उमड़ता है, वहाँ गद्य लेखन की कोई जगह नहीं फिर क्यों वे लोग मेरे ब्लॉग पर कमेंट करते वक़्त फरमाते हैं कि हमारे इस एग्रीगेटर पर पधारिये, तब मन करता है कि दो चार कड़वी बात सुना ही दूँ। इसके अलावा ज्यादातर ब्लॉग एग्रीगेटर सिर्फ लेटेस्ट यानी आज की डेट में लिखी हुई रचना को ही लिंक करते हैं तो फिर जो पुरानी हैं उनका क्या ?? क्या उनको कभी शामिल नहीं किया जाना चाहिए ??
गुस्सा इस बात का ज्यादा आता है की हिंदी ब्लॉगर्स के लिए वैसे भी इंग्लिश एग्रीगेटर्स जैसे इंडीब्लोगर्स और ब्लॉगअड्डा वगैरह पर बहुत ज्यादा स्कोप नहीं रहता तब ऐसे में अगर हिंदी के चर्चा ब्लॉग्स भी ऐसा भेदभाव करेंगे तो फिर इनका क्या उपयोग हमारे लिए ?? अभी कुछ समय पहले की बात है कि इंडीब्लॉगर पर एक फोरम डिस्कशन पर मैंने इस मुद्दे को उठाया था कि हिंदी में लिखने वालों को न वोट्स मिलते हैं ना कमेंट्स और ना ही कोई ऑनलाइन कांटेस्ट ऐसा होता है जिसमे हिंदी को भी जगह मिलती हो और हिंदी में लिखी पोस्ट का जीतना तो खैर दूर की कौड़ी लगती है, बड़ी तीखी बहस हुई थी … तब उन अंग्रेजी में लिखने वालों ने इस बात को माना कि हिंदी ब्लॉगर्स की तरफ ध्यान नहीं जाता ऐसे में जब इन संकलक का ये व्यवहार देखती हूँ तो लगता है कि दोष पढ़ने का वालों का उतना नहीं जितना इन सो कॉल्ड चैनल्स का है जो अपनी सुविधा या पसंद के हिसाब से चलते हैं.
कुछ समय पहले भी इसी मुद्दे पर एक Essay लिखा था



