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Tuesday, 23 July 2019

Time and Space

Me : It is very boring today.

Time :  .....

Me : How to pass the time ?

Time : You can't pass me. you are going through me.  Every second,  every nano second.

Me :  I have not asked for a philosophical response.

Time :  I am everywhere,  you can't escape.

Me :  I have not asked for an escape. I am asking how to kill this boredom.

Time : You can't kill,  you can only go through it.

Me :  will you please ...

Time : Go out, roam around the city and create a day.

Me : With whom should I go ?

Time : With me !!! I am always with you.  I am around you.  I am everywhere.  

Me :  Oh please, not again . So boring it is. 

Time :  .........................................................



Monday, 11 June 2018

आदमी और कहानी

इस दुनिया का हर आदमी एक कहानी है।  उसका बोलना, चलना, रहना,  व्यव्हार, जीवन सब कुछ एक लम्बी ऊबा देने वाली कहानी है जिसके प्लाट और थीम को हर समय प्रेडिक्ट करने की कोशिश की जाती है।  दुनिया का ये सारा कारोबार, ये जगमग, ये  कोलाहल इन ढेर सारी कहानियों का ही एक मिला जुला सा  ताना बाना  है।  इस तरह ये दुनिया एक बहुत बड़ी कहानी है जिसमे कई सारी उप कथाएं और अनगिनत किरदार हैं।  


इतनी सारी कहानियों के बीच रहते रहते आदमी अक्सर अपनी खुद की कहानी जिसका वो सबसे मुख्य पात्र है,  उसे  भूल कर दूसरों की कहानी में उलझ जाता है। वैसे कहानियां उलझने उलझाने के लिए ही बुनी जाती  हैं।   किसी एक कहानी का हीरो  किसी दूसरी कहानी का विलेन बना हुआ दीखता है।  जो लोग एक कहानी में दोस्त हैं  वही लोग किसी दूसरी कहानी में छिपे दुश्मन भी हो सकते हैं।  ऐसा इसलिए होता है कि इंसानी दुनिया दिल और दिमाग दोनों  के घालमेल से चलती है।  कौनसी तार कहाँ से शुरू होकर कहाँ जुड़ती है और कहाँ से वापिस मुड़ जाती है ये तो शायद सृष्टि का मालिक भी नहीं समझ पाता होगा।  

बहुत सारी कहानियां तो बस आदमी के दिमाग में ही उपजती और फिर वहीँ  गुम हो जाती हैं।  आदमी अपने हिसाब से कहानी को तोड़ता मोड़ता जाता है , घटनाएं जो कभी हुईं तो कभी ना हुईं परउनकी एक श्रृंखला अपने दिमाग में जोड़ता जाता है. फिर इस तरह दिमाग के कूड़ा घर में बहुत सारी तहें परतें जमा होती जाती हैं.  आदमी का दिमाग एक मोहनजोदड़ो की कोई साइट बन जाता है, जिसे अगर खोदा जाए तो परत दर परत बहुत सारे ढाँचे निकलेंगे.... आधी पूरी कच्ची पक्की कहानियों के।  

आदमी का होना भी एक कहानी है।  एक निरंतर चलती लाइव कहानी।  सिनेमा के परदे पर दिखाई  जाए  या किसी नाटक के मंच पर, इसका  रहस्य रोमांच, प्रेम और घृणा ,  भय और निर्भीकता सारे द्वंद्व  एक सामान तीव्रता से बहे जाते हैं।  हम सब अपनी अपनी इन लाइव कहानियों  को जी रहे हैं  और  एक दुसरे के मनोरंजन या जुगुप्सा का साधन  बने हुए हैं.